Tuesday, May 6, 2008
क्या है महंगाई दर?
हम हमेशा जानने की कोशिश करते हैं कि महंगाई का पता कैसे लगता है? महंगाई जानने के कई तरीके हैं। भारत में सबसे प्रमाणिक तरीका है थोक बिक्री मूल्य में हो रहे उतार-चढ़ाव को मापना। इसके लिए एक सूचकांक (इंडेक्स) है जिसे ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (डब्ल्यूपीआई) कहते हैं। थोक मूल्य सूचकांक के बढ़ने का मतलब महंगाई में तेजी और इसके गिरने का मतलब हुआ महंगाई में कमी।
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इस सूचकांक में 435 अलग-अलग वस्तुओं का लेखा-जोखा रखा जाता है। सूचकांक में शामिल हर वस्तु को एक वेटेज यानी वजन दिया गया है। ये इस आधार पर तय किया गया है कि किन वस्तुओं की हमारी जिंदगी में कितनी अहमियत है।
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सबसे ज्यादा करीब 64 फीसदी वजन चीनी, स्टील और कपड़े जैसी वस्तुओं को दिया जाता है। इसके अलावा दाल-चीनी, फल और सब्जी जैसी जरुरी खाने-पीने की वस्तुओं को 22 फीसदी वजन दिया जाता है। ईंधन और बिजली जैसे पदार्थों को 14 फीसदी वजन दिया जाता है।
डॉक्टर और वकील की शुल्क, मकान का किराया, विद्यालय शुल्क जैसी सेवाओं की कीमत में बदलाव का लेखा-जोखा ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (डब्ल्यूपीआई) नहीं करता है। साथ ही इस सूचकांक के जरिए खुदरा कीमतों का हिसाब-किताब रखना मुश्किल होता है।
जानकारों का ये भी कहना है कि इस सूचकांक में कई ऐसी वस्तुओं की कीमतों का लेखा-जोखा होता है जिनका हमारी जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं है।
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