Saturday, March 26, 2011

बदल रहा बिहार

बिहार व बिहारी की अवधारणा व सोच के मायने वे लोग अधिक जानते होंगे, जो अपने प्रदेश को छोड़ अन्य प्रदेशों में जा बसे हैं। लंबे समय तक अपने प्रदेश को छोड़ बाहर रहते हुए हम आपस में चर्चा करते हैं, कब बिहार व बिहारी अवधारणा में बदलाव आयेगा। कब हम व्यावहारिक सोच के साथ अपने गांव लौटने की इच्छा रखेंगे। ऐसी चर्चाएं पहले भी करते थे, पर एक निराशा के साथ। लेकिन, आज जब हम चर्चा करते हैं, तो लगता है वह दिन अब वास्तव में करीब है।

इसे रोकना होगा

कुछ दिनों पहले लातेहार के चंदवा में बाल विवाह का मामला सामने आया। कितने दुख की बात है अब भी झारखंड अपने सामाजिक पिछड़ेपन के त्रास से निकल पाने में अक्षम है। यह भी सुनने में आया है कि नक्सली खौफ के कारण लोग बाल विवाह को प्रेरित होते हैं। बाल मन में जब ऊंचाई छूने, कुछ दिखाने का जज्बा होता है, वहां गृहस्थी की सोच जबरन लादना अच्छी बात नहीं। इस लकीर को हटाना होगा, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

बदल रहा बिहार

बिहार व बिहारी की अवधारणा व सोच के मायने वे लोग अधिक जानते होंगे, जो अपने प्रदेश को छोड़ अन्य प्रदेशों में जा बसे हैं। लंबे समय तक अपने प्रदेश को छोड़ बाहर रहते हुए हम आपस में चर्चा करते हैं, कब बिहार व बिहारी अवधारणा में बदलाव आयेगा। कब हम व्यावहारिक सोच के साथ अपने गांव लौटने की इच्छा रखेंगे। ऐसी चर्चाएं पहले भी करते थे, पर एक निराशा के साथ। लेकिन, आज जब हम चर्चा करते हैं, तो लगता है वह दिन अब वास्तव में करीब है।