Tuesday, May 6, 2008

विदेशों में हिन्दी

आज दुनिया का कौन-सा कोना है, जहां भारतीय न हों । अनिवासी भारतीय सपूर्ण विश्व में फैले हुए हैं । दुनिया के डेढ सॊ से अधिक देशों में दो करोड़ से अधिक भारतीयों का बोलबाला है। अधिकांश प्रवासी भारतीय आर्थिक रूप से समृध्द हैं । 1999 में मशीन ट्रांसलेशन शिखर बैठक में में टोकियो विश्वद्यालय के प्रो. होजुमि तनाका ने जो भाषाई आंकड़े प्रस्तुत किए थे, उनके अनुसार विश्व में चीनी भाषा बोलने वालों का स्थान प्रथम और हिन्दी का द्वितीय तथा अंग्रेजी का तृतीय है ।
हिन्दी विश्व के सर्वाधिक आबादी वाले दूसरे देश भारत की प्रमुख भाषा है तथा फारसी लिपि में लिखी जाने वाली भाषा उर्दू हिन्दी की ही एक अन्य शैली है । लिखने की बात छोड़ दें तो हिन्दी और उर्दू में कोई विशेष अंतर नहीं रह जाता सिवाय इसके कि उर्दू में अरबी, फारसी, तुर्की आदि शब्दों का बहुलता से इस्तेमाल होता है। एक ही भाषा के दो रूपों को हिन्दी और उर्दू, अलग-अलग नाम देना अंग्रेजों की कूटनीति का एक हिस्सा था ।
विदेशों में चालीस से अधिक देशों के 600 से अधिक विश्वविद्यालयों और स्कूलों में हिन्दी पढाई जा रही हैं । भारत से बाहर जिन देशों में हिन्दी का बोलने, लिखने-पढने तथा अध्ययन और अध्यापक की दृष्टि से प्रयोग होता है, उन्हें हम इन वर्गों में बांट सकते हैं - 1. जहां भारतीय मूल के लोग अधिक संख्या में रहते हैं, जैसे - पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बंगलादेश, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव आदि । 2. भारतीय संस्कृति से प्रभावित दक्षिण पूर्वी एशियाई देश, जैसे- इंडोनेशिया, मलेशया, थाईलैंड, चीन, मंगोलिया, कोरिया तथा जापान आदि । 3. जहां हिन्दी को विश्व की आधुनिक भाषा के रूप में पढाया जाता है अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा और यूरोप क देश। 4. अरब और अन्य इस्लामी देश, जैसे- संयुक्त अरब अमरीरात (दुबई) अफगानिस्तान, कतर, मिस्र, उजबेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि ।

मॉरिशस
यहां भारतीय मूल के लोगों की जनसंख्या कुल आबादी की आधे से अधिक है । मॉरिशस की राजभाषा अंग्रेजी है और फ्रेंच की लोकाप्रेम है । फ्रेंच के बाद हिन्दी ही एक ऐसी महत्वपूर्ण एवं सशक्त भाषा है जिसमें पत्र-पत्रिकाओं तथा साहित्य का प्रकाशन होता है । मॉरिशस में भारतीय प्रवासियों का विधिवत आगमन चीनी उद्योग के बचाव तथा उसके विकास हेतु 1834 में शुरू हुआ था । यूरोप में चीनी की बढती मांग को ध्यान में रखकर तत्कालीन प्रशासकों ने भारतीयों को सशर्त यहां लाकर स्थायी रूप से बसने का प्रावधान किया । मॉरिशस में भारतीय प्रवासी वर्ष 1834 से बंधुआ मजूदरों के रूप में आने लगे थे । ये लोग अधिकांशत: भारत के बिहार प्रदेश के छपरा, आरा और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, गोंडा आदि जिलों के थे । भारतीय श्रमिकों ने विकट परिस्थितियों से गुजरते हुए भी अपनी संस्कृति एवं भाषा का परित्याग नहीं किया । अपने प्रवासकाल में महात्मा गांधी जब 1901 में मॉरिशस आए तो उन्होंने भारतीयों को शिक्षा तथा राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय भाग लेने के लिए प्रेरित किया । हिन्दी प्रचार कार्य में हिंदुस्तानी पत्र का योगदान महत्वपूर्ण है।
धार्मिक तथा सामाजिक संस्थाओं के उदय होने से यहां हिन्दी को व्यापक बल मिला । वर्ष 1935 में भारतीय आगमन शताब्दी समारोह मनाया गया । उस समय यहां से हिन्दी के कई समाचारपत्र प्रकाशित होते थे, जिनमें आर्यवीर, जागृति आदि उल्लेखनीय है । वर्ष 1941 में हिन्दी प्रचारिणी सभा ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन तथा हिन्दी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया । 1943 में हिन्दू महायज्ञ का सफल आयोजन किया गया। 1948 में जनता के प्रकाशन के माध्यम से दर्जनों नवोदित हिन्दी लेखक साहित्य सृजन क्षेत्र में आए ।
वर्ष 1950 में यहां हिन्दी अध्यापकों का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ और 1954 से भारतीय भाषाओं की विधिवत पढाई शुरू हुई। मॉरिशस सरकार ने स्कूलों में छठी कक्षा तक हिन्दी पढाने की व्यवस्था की । वर्ष 1961 में मॉरिशस हिन्दी लेखक संघ की स्थापना हुई। यह संघ प्रतिवर्ष साहित्यिक प्रतियोगिताओं, कवि सम्मेलनों, साहित्यकारों की जयंतियां आदि का आयोजन करता है। मॉरिशस में हिन्दी भाषा का स्तर ऊंचा उठाने में हिन्दी प्रचारिणी सभा का योगदान अतुलनीय है। यह संस्था हिन्दी साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) की परीक्षाओं का प्रमुख केन्द्र है। औपनिवेशिक शोषण और संकट के समय 1914 में हिन्दुस्तानी, 1920 में टाइम्स और 1924 में मॉरिशस मित्र दैनिक पत्र थे । आज मॉरिशस में वसंत, रिमझिम, पंकज, आक्रोश, इन्द्रधनुष, जनवाणी एवं आर्योदय हिन्दी में प्रकाशित होते हैं। वर्ष 2001 में विश्व हिन्दी सचिवालय की स्थापना भी मॉरिशस में हो चुकी है।

फिजी
फिजी दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित 322 द्वीपों का समूह है । यहा के मूल निवासी काईबीती है । देश की आबादी लगभग 8 लाख है । इसमें 50 प्रतिशत काईबीती, 44 प्रतिशत भारतीय तथा 6 प्रतिशत अन्य समुदाय के हैं। 5 मई 1871 में प्रथम जहाज लिओनीदास ने 471 भारतीयों को लेकर फिजी में प्रवेश किया था । गिरमिट प्रथा के अंतर्गत आए प्रवासी भारतीयों ने फिजी देश को जहां अपना खून-पसीना बहाकर आबाद किया वहीं हिन्दी भाषा की ज्योति भी प्रज्जवलित की जो आज भी फिजी में अपना प्रकाश फैला रही है।
फिजी की संस्कृति एक सामासिक संस्कृति है, जिसमें काईबीती, भारतीय, आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के निवासी है। इनकी भाषा काईबीती (फीजियन) हिन्दी तथा अंग्रेजी है। फिजी का भारतीय समुदाय हिन्दी में कहानी, कविताएं लिखता है। हिन्दी प्रेमी लेखकों ने हिन्दी समिति तथा हिन्दी केन्द्र बनाए हैं जो वहां के प्रतिष्ठित लेखकों के निर्देशन में गोष्ठियां, सभा तथा प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं। इनमें हिन्दी कार्यक्रम होते हैं कवि और लेखक अपनी रचनाएं सुनाते हैं ।
फिजी में औपचारिक एवं मानक हिन्दी का प्रयोग पाठशाला के अलावा शादी, पूजन, सभा आदि के अवसरों पर होता है। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सभी बाह्य परीक्षाओं में हिन्दी एक विषय के रूप में पढाई जाती है । फिजी के संविधान में हिन्दी भाषा को मान्यता प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति सरकारी कामकाज,अदालत तथा संसद में भी हिन्दी भाषा का प्रयोग कर सकता है। हिन्दी के प्रचार-प्रसार में पत्र-पत्रिकाओं तथा रेडियो कारगर माध्यम हैं। हिन्दी के प्रचार-प्रसार में फिजी हिन्दी साहित्य समिति वर्ष 1957 से बहुमूल्य योगदान दे रही है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य है हिन्दी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति को बढावा देना । फिजी में हिन्दी प्रगति के पथ पर है तथा इसका भविष्य उज्ज्वल है।

नेपाल
भौगोलिक और राजनीतिक दृष्टि से भारत और नेपाल संप्रभु राष्ट्र है, दोनों देशों के बीच पौराणिक काल से संबंध चला आ रहा है, खुली सीमाएं, तीज-ज्यौहार, धार्मिक पर्व-समारोह तथा इन्हें मानाने की शैली और पध्दति की समानता के अतिरिक्त नेपाल में हिन्दी-प्रेम हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए काफी है। नेपाली भाषा हिन्दी भाषी पाठकों लिए सुबोध है। यदि इसमें कोई अंतर है तो लिप्यांतरण का है।
प्रचीन काल में नेपाली में संस्कृत की प्रधानता थी। हिन्दी और नेपाली दोनों भाषाओं में संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों की प्रचुरता और इनके उदार प्रयोग के अतिरिक्त नेपाली भाषा में अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी एवं कई अन्य विदेशी शब्दों का हिन्दी के समान ही प्रयोग हिन्दी और नेपाली भाषी जनता को एक दूसरे की भाषा समझने में सहायक रहा है। प्रारंभिक दिनों में नेपाल के तराई क्षेत्रों में स्कूलों में तो शिक्षा का माध्यम हिन्दी बना । काठमांडू से हिन्दी में पत्र-पत्रिका का प्रकाशन हाता है। प्रख्यात नेपाली लेखक, कहानीकार एवं उपन्यासकार डा. भवानी भिक्षु ने तो अपने लेखन कार्य का श्रीगणेश हिन्दी से ही किया। गिरीश वल्लभ जोशी, रूद्रराज पांडे, मोहन बहादुर मल्ल, हृदयचंद्र सिंह प्रधान आदि की एक न एक कृति हिन्दी में ही है।

श्रीलंका
श्रीलंका में भारतीय रस्म-रिवाज, धार्मिक कहानियां जैसे जातक कथा का भंडार आज भी सुरक्षित है । श्रीलंका की संस्कृति वही है जो भारत की है। वहां हिन्दी का प्रचार अत्यंत सुचारू एवं सुव्यवस्थित ढंग से होता रहता है । फिल्म प्रदर्शन, भाषण विचार गोष्ठी आदि का आयोजन होता रहता है। भारत से आई पत्र-पत्रिकाओं जैसे बाल भारती, चंदा मामा, सरिता आदि श्रीलंका में बड़े चाव से पढी ज़ाती हैं। श्रीलंका रेडियो पर भारतीय शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। वहां विश्वविद्यालय में हिन्दी पढाI जा रही है।

यू.ए.ई.
संयुक्त अरब अमीरात देश की पहचान सिटी ऑफ गोल्ड दुबई से है। यूएई में एफ. एम. रेडियो के कम से कम तीन ऐसे चैनल हैं, जहां आप चौबीसों घंटे नए अथवा पुराने हिन्दी फिल्मों के गीत सुन सकते हैं। दुबई में पिछले अनेक वर्षों से इंडो-पाक मुशायरे का आयोजन होता रहा है, जिसमें हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के चुनिंदा कवि और शायर भाग लेते रहे हैं। हिन्दी के क्षेत्र में खाड़ी देशों की एक बड़ी उपलब्धि है, दो हिन्दी (नेट) पत्रिकाएं जो विश्व में प्रतिमाह 6,000 से अधिक लोगों द्वारा 120 देशों में पढी ज़ाती हैं। अभिव्यक्ति व अनुभूति www.abhivykti-hindi.org तथा www.anubhuti-hindi.org के पते पर विश्वजाल (इंटरनेट) पर मुफ्त उपलब्ध हैं। इन पत्रिकाओं की संरचना सही अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय है क्योंकि इनका प्रकाशन और संपादन संयुक्त अरब अमीरात से, टंकण कुवैत से, साहित्य संयोजन इलाहाबाद से और योजना व प्रबंधन कनाडा से होता है।
ब्रिटेनवासियों ने हिन्दी के प्रति बहुत पहले से रुचि लेनी आरंभ कर दी थी । गिलक्राइस्ट, फोवर्स-प्लेट्स, मोनियर विलियम्स, केलाग होर्ली, शोलबर्ग ग्राहमवेली तथा ग्रियर्सन जैसे विद्वानों ने हिन्दीकोष व्याकरण और भाषिक विवेचन के ग्रंथ लिखे हैं। लंदन, कैंब्रिज तथा यार्क विश्वविद्यालयों में हिन्दी पठन-पाठन की व्यवस्था है। यहां से प्रवासिनी, अमरदीप तथा भारत भवन जैसी पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। बीबीसी से हिन्दी कार्यक्रम प्रसारित होते हैं ।
संयुक्त राज्य अमेरिका में येन विश्वविद्यालय में 1815 से ही हिन्दी की व्यवस्था है। वहां आज 30 से अधिक विश्वविद्यालयों तथा अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा हिन्दी में पाठ्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 1875 में कैलाग ने हिन्दी भाषा का व्याकरण तैयार किया था। अमरीका से हिन्दी जगत प्रकाशित होती है ।
रूस में हिन्दी पुस्तकों का जितना अनुवाद हुआ है, उतना शायद ही विश्व में किसी भाषा का हुआ हो। वारान्निकोव ने तुलसी के रामचरितमानस का अनुवाद किया था। त्रिनीडाड एवं टोबेगो में भारतीय मूल की आबादी 45 प्रतिशत से अधिक है। युनिवर्सिटी ऑफ वेस्टइंडीज में हिन्दी पीठ स्थापित की गई है। यहां से हिन्दी निधि स्वर पत्रिका का प्रकाशन होता है। गुयाना में 51 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय मूल के हैं। यहां विश्वविद्यालयों में बी.ए. स्तर पर हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था की गई है। पाकिस्तान की राजभाषा उर्दू है, जो हिन्दी का ही एक रूप है । मात्र लिपि में ही अंतर दिखाई देता है। मालदीव की भाषा दीवेही भारोपीय परिवार की भाषा है । यह हिन्दी से मिलती-जुलती भाषा है। फ्रांस, इटली, स्वीडन, आस्ट्रिया, नार्वे, डेनमार्क तथा स्विटजरलैंड, जर्मन, रोमानिया, बल्गारिया और हंगरी के विश्वविद्यालयों में हिन्दी के पठन-पाठन की व्यवस्था है ।
इस प्रकार हिन्दी आज भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के विराट फलक पर अपने अस्तित्व को आकार दे रही है। आज हिन्दी विश्व भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। अब तक भारत और भारत के बाहर सात विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं। पिछले सात सम्मेलन क्रमश: नागपुर (1975), मॉरीशस (1976), नई दिल्ली (1983), मॉरीशस (1993), त्रिनिडाड एंड टोबेगो (1996), लंदन (1999), सूरीनाम (2003) में हुए थे। अगला विश्व हिन्दी सम्मेलन 2007 में न्यूयार्क में होगा। इसके अतिरिक्त विदेश मंत्रालय क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन का भी आयोजन करता रहा है। अभी तक ये सम्मेलन ऑस्ट्रेलिया और अबूधाबी में फरवरी, 2006 तथा तोक्यो में जुलाई 2006 में किए गए थे। अभी हाल ही में शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को विदेश मंत्रालय ने हिन्दी वेबसाइट का शुभारंभ किया है। यह वेबसाइट माइक्रोसॉपऊट विंडोज प्रोग्राम और यूनीकोड पर आधारित है । इसे देखने के लिए कोई फॉन्ट डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है। वेबवाइट का पता है : www.mea.gov.in ।
वर्तमान में आर्थिक उदारीकरण के युग में बहुराष्ट्रीय देशों की कंपनियों ने अपने देशों (अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन आदि) के शासकों पर दबाव बढाना शुरू कर दिया है ताकि वहां हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार तेजी से बढे ऒर हिन्दी जानने वाले एशियाई देशों में वे अपना व्यापार उनकी भाषा में सुगमता से कर सकें। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी की प्रगति यदि इसी प्रकार होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी संयुक्त राष्ट्र संघ में एक अधिकारिक रूप हासिल कर लेगी।
राकेश शर्मा निशीथ

सायबर अपराध

भारत में पहली इंटरनेट सेवा की शुरुआत वी.एस.एन.एल. द्वारा 14 अगस्त, 1995 को हुई। लेकिन इंटरनेट पर होने वाले अपराधों को रोकने का पहला क़ानून (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000) 17 अक्तूबर, 2000 को लागू हुआ और देश में पहले सायबर पुलिस थाने की स्थापना बंगलोर में 4 सितम्बर, 2001 को हुई और पहले सायबर अपराधी आरिफ़ आज़िम की गिरफ्तारी 24 जुलाई, 2002 को हो पाई।

ज़ुर्म की शुरुआत उससे संबंधित क़ानूनों के बनने से पहले हो जाती है। नए क़ानून बनाने या पुराने क़ानूनों में संशोधन की जरूरत तब महसूस होती है जब किसी ज़ुर्म को पुराने क़ानूनों की मदद से रोकना असंभव हो जाता है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि क़ानून की मौजूदगी भी ज़ुर्म को होने से नहीं रोक पाती। ज़ुर्म करने वाले या तो क़ानूनों से अनजान होते हैं या फिर उनकी परवाह नहीं करते। क़ानून ज़ुर्म करने वाले के पीछे चलता है और अपराधी को पकड़ पाना तभी संभव हो पाता है जब क़ानून के कारिंदे अपराधी से अधिक तेज रफ्तार में उसका पीछा करते हैं। सायबर अपराधों के मामले में स्थिति कुछ और विचित्र है। यहां अपराधी अपने ठिकाने पर बैठे-बैठे ज़ुर्म को अंजाम देते हैं और सफेदपोश बनकर पुलिस की नजरों से ओझल रहते हैं। जब कोई अपराध करके भाग रहा हो तो पुलिस के लिए उसके मूवमेंट पर लगातार नज़र रखते हुए पकड़ लेना अपेक्षाकृत आसान रहता है, लेकिन जब अपराधी भाग नहीं रहा हो तो उसे पकड़ पाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती होती है।

सायबर अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने के मामले में एक बड़ी दिक्कत तो यह है कि न तो पुलिस इंटरनेट टेक्नोलॉजी में पर्याप्त प्रशिक्षित है, न वकील और न ही जज। वे क़ानून तो अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी को नहीं। जबकि सायबर अपराधी टेक्नोलॉजी के मामले में अक्सर बेहतर प्रशिक्षित होते हैं। और, टेक्नोलॉजी इतनी तेज रफ्तार से आगे भागती है कि नया से नया क़ानून भी कुछ ही अरसे में अप्रासंगिक लगने लगता है। वर्ष 2000 में जब भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम नामक विशेष क़ानून लागू हुआ था तो इसे क़ानून के क्षेत्र में एक अत्यंत क्रांतिकारी और दूरगामी कदम माना गया, लेकिन कुछ ही वर्ष बाद यह क़ानून अपर्याप्त साबित होने लगा। लिहाजा उक्त क़ानून में संशोधन की जरूरत और मांग को देखते हुए एक विशेषज्ञ समिति के सुझावों के आधार पर काफी विचार-विमर्श के बाद सरकार ने 15 दिसम्बर, 2006 को लोक सभा के शीतकालीन सत्र में उक्त क़ानून में व्यापक संशोधन किए जाने के लिए एक विधेयक पुर:स्थापित किया है। हालांकि प्रस्तावित नए क़ानून के दायरे में सायबर अपराध के विभिन्न रूपों को लाने की कोशिश की गई है, लेकिन कहना मुश्किल है कि उनको लागू करा पाना प्रवर्तन एजेंसियों के लिए कहां तक संभव हो सकेगा। प्रस्तावित संशोधनों के कारगर सिद्ध होने पर अभी से संदेह व्यक्त किए जाने लगे हैं।

इंटरनेट से जुड़े अधिकांश अपराध चूंकि भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं, दूसरी राष्ट्रीयता वाले सायबर अपराधियों को अपने क़ानूनों के दायरे में ला पाना और उनपर मुकदमा चलाना बहुत मुश्किल होता है, भले ही ऐसा करने के लिए क़ानूनी उपबंध मौजूद हों। उदाहरण के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 75 (1) में कहा गया है -

….the provisions of this Act shall apply also to any offence or contravention committed outside India by any person irrespective of his nationality.

(…इस अधिनियम के उपबंध भारत से बाहर किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी अपराध अथवा उल्लंघन पर भी लागू होंगे, चाहे उसकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो।)

क़ानून की इस धारा का इस्तेमाल अमेरिका में बसे भारतीय मूल के युवक गौतम प्रसाद द्वारा दिसम्बर, 2006 में यूट्यूब.कॉम की वीडियो शेयरिंग सेवा के जरिए अपनी वेबसाइट पर महात्मा गांधी की वेशभूषा वाले एक व्यक्ति को अश्लील हरकतें करते दिखाए जाने के मामले में किया जा सकता था, लेकिन इस मामले पर देश भर में हुई व्यापक और तीव्र प्रतिक्रिया को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद उसने इस मामले में कोई कार्रवाई करने की पहल नहीं की। जबकि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) के पास इस मामले में समुचित कार्रवाई कर सकने के लिए पर्याप्त अधिकार हैं। अलबत्ता उक्त वीडियो के कुछ अंश ख़बर के रूप में सीएनएन-आईबीएन तथा सहारा टी.वी. द्वारा दिखाए जाने पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उन दोनों न्यूज चैनलों को नोटिस जरूर भेज दिया।

राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान 15 मार्च, 2007 को संसद सदस्य जनेश्वर मिश्र द्वारा इस बारे में प्रश्न किए जाने पर संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री दयानिधि मारन का उत्तर था:

A website by the name http://youtube.com has hosted some objectionable content regarding Mahatma Gandhi. This said website is hosted on servers in United States of America. Information Technology Act, 2000 together with Indian Penal Code provides a legal framework to check misuse of websites and cyber crimes in India.

However, the websites hosted on the servers abroad are subject to the laws of those countries. This poses technological as well as legal issues in taking action against such websites.

(यूट्यूब.कॉम नामक एक वेबसाइट ने महात्मा गांधी के बारे में कुछ आपत्तिजनक सामग्री होस्ट की है। उक्त वेबसाइट संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित सर्वरों पर होस्ट है। भारतीय दंड संहिता के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत भारत में वेबसाइटों के दुरुपयोग और सायबर अपराधों को रोकने के लिए क़ानूनी कार्यढांचे का उपबंध है।

तथापि, विदेश स्थित सर्वरों पर होस्ट किए गए वेबसाइट उन देशों के क़ानूनों के अध्यधीन हैं। इसलिए ऐसी वेबसाइटों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकने में प्रौद्योगिकीय तथा विधिक मुद्दों की अड़चनें है।)

इस मामले में बंगलौर स्थित एक गैर-सरकारी संगठन डिजिटल सोसायटी फाउंडेशन द्वारा कर्णाटक उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करके भारत सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई। इस मामले में 16 अप्रैल, 2007 को सुनवाई होनी थी, लेकिन फिलहाल यह सुनवाई कुछ और दिनों के लिए टल गई है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में इंटरनेट पर इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री को प्रकाशित या प्रचारित करने के दोषी व्यक्तियों के लिए दंड का मौजूदा प्रावधान निम्नानुसार है:

67. Whoever publishes or transmits or causes to be published or transmitted in the electronic form, any material which is lascivious or appeals to the prurient interest or if its effect is such as to tend to deprave and corrupt persons who are likely, having regard to all relevant circumstances, to read, see or hear the matter contained or embodied in it, shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to two years and with fine which may extend to five lakh rupees and in the event of second or subsequent conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to five years and also with fine which may extend to ten lakh rupees.

लेकिन, प्रस्तावित नए विधेयक में उक्त उपबंध के साथ एक और उपबंध जोड़ते हुए निम्नानुसार दंड का प्रावधान भी किया गया है:

67A. Whoever publishes or transmits or causes to be published or transmitted in the electronic form any material which contains sexually explicit act or conduct shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to five years and with fine which may extend to ten lakh rupees and in the event of second or subsequent conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years and also with fine which may extend to ten lakh rupees.

इन उपबंधों के संदर्भ में निम्न स्पष्टीकरण भी जोड़ा गया है:

This section and section 67 does not extend to any book, pamphlet, paper, writing, drawing, painting, representation or figure in electronic form the publication of which is proved to be justified as being for the public good on the ground that such book, pamphlet, paper, writing, drawing, painting, representation or figure is in the interest of science, literature, art or learning or other objects of general concern; or which is kept or used bona fide for religious purposes.

ये इंफ़्रा इंफ़्रा क्या है?

सबसे पहले तो आप लोगों का धन्यवाद कि आप लोगों ने मुझ नाचीज के लिखे शेयर बाजार/अर्थ चर्चा के विषय पर लिखे लेखों को पसन्द किया। यदि आप शेयर बाजर मे रुचि रखते है तो आपने अक्सर इंफ़्रास्ट्रकचर शब्द के बारे में होगा। इस लेख को लिखने का आइडिया मेरे को मेरे एक मित्र के सवाल पर आया। एक पार्टी मे बात करते समय किसी ने मेरे से पूछा कि आजकल जिसे देखो सभी लोग इंफ़्रास्ट्रकचर इंफ़्रास्ट्रकचर वाली कम्पनियों के शेयर या इस सेक्टर के म्यूचल फंड मे निवेश पर जोर दे रहे है, आखिर ये होता क्या है? और इसमे निवेश क्यों किया जाना चाहिए? यह लेख शेयर/म्यूचल फंड बाजार के निवेशकों को ध्यान मे रखकर लिखा जा रहा है। उम्मीद है इस लेख के द्वारा मै उस मित्र और अपने पाठकों के ज्ञान मे कुछ वृद्दि कर सकूंगा।


इंफ़्रास्ट्रकचर, यानि बुनियादी अथवा ढांचागत सुविधाएं। इंफ़्रास्ट्रकचर शब्द का प्रयोग कई स्थानो पर अलग अलग तरीके से होता है। किसी भी देश की तरक्की उसकी बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर करती है। यही उसकी इकोनामी को भी आगे बढाती है। जिस देश मे बुनियादी सुविधाओं का ढांचा जितनी जल्दी तैयार होगा उस देश की इकोनामी उतनी तेजी से बढेगी। विदेशी निवेश भी इन सभी सुविधाओं को देखकर होता है। हम ज्यादा दूर क्यों जाएं, अपने पड़ोसी देश चीन का ही उदाहरण लें, उसने पिछले बीस वर्षों मे अपने यहाँ बुनियादी सुविधाओं मे क्रांतिकारी परिवर्तन किया है, चीन की तरक्की किसी से छिपी नही है और विदेशी निवेश मे भी चीन पहले नम्बर पर है। बुनियादी सुविधाओं मे काफी चीजे शामिल होती है जैसे:

बिजली (पावर)
सड़कें
रेलवे
सिंचाई सुविधाएं (Irrigation), जल संसाधन और जल आपूर्ति सुविधाएं
टेलीकम्यूनिकेशन
पोर्ट सुविधाएं
एयरपोर्ट सुविधाएं
लाजिस्टिक और स्टोरेज
प्राकृतिक गैस से सम्बंधित सुविधाएं
अन्य बुनियादी सुविधाएं (जैसे शिक्षा, तकनीकी ट्रेंनिग वगैरहा वगैरहा)


बिजली

हमारे देश मे बिजली की समस्या सबसे बड़ी बुनियादी समस्याओं मे से एक है। अभी भी मांग और आपूर्ति मे काफी फर्क है। सरकार को आशा है कि 2012 तक देश के हर नागरिक तक बिजली की सुविधाएं पहुँच जाएगी। इसके लिए सरकार काफी प्रयत्न भी कर रही है, जैसे पावर क्षेत्र को प्राइवेट कम्पनियों के लिए खोलना, बड़े बड़े पावर प्लांट लगाना, थर्मल पावर की जगह परमाणु बिजली पर विचार करना, बिजली बोर्डों की कार्यप्रणाली मे परिवर्तन करना। इस क्षेत्र मे काफी विकास होना है, इसलिए पावर कम्पनियों या उससे सम्बंधित कम्पनियों को इससे विशेष लाभ होगा। जाहिर है इन कम्पनियों के शेयरों मे भी उछाल आएगा। इस क्षेत्र की जिन कम्पनियों पर नजर रखी जा सकती है वो है : भेल, एल एंड टी, सीमेंस, पावरग्रिड, एनटीपीसी, एबीबी, रिलायंस पावर, बिजली के तार बनाने वाली कम्पनियां।

सड़कें

भारत मे सड़कें तो है, लेकिन उनकी हालत काफी बिगड़ी हुई है। इसके अतिरिक्त अभी भी एक्सप्रेस वे की काफी कमी है। देश के विभिन्न हिस्सों को आपस मे जोड़ने वाले हाई स्पीड एक्सप्रेस वे बन जाने से कई फायदे होंगे एक तो माल की ढुलाई आसान होगी, दूसरा रेलवे पर निर्भरता कम होगी। पिछली केंद्र सरकार ने इस ओर ध्यान दिया था और ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर तथा कई अन्य परियोजिनाएं शुरु की थी। मौजूदा केंद्र सरकार भी इन परियोजनाओं को आगे बढाने के लिए प्रयास कर रही है। इस क्षेत्र मे अभी काफी काम किया जाना बाकी है। इसके अतिरिक्त सुचारू ट्रैफ़िक के लिए हजारो फ़्लाईओवर और पुल बनाए जाने बाकी है। इस क्षेत्र की जिन कम्पनियों पर नज़र रखी जा सकती है वे है एल एंड टी, गैमन इंडिया, हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कम्पनी, जीएमआर, आईवीआरसीएल।


रेलवे

रेलवे भारत की धड़कन है। भारतीय रेलवे दुनिया मे सबसे ज्यादा यात्रियों को प्रतिदिन उनके गंतव्य तक पहुँचाता है। लेकिन अभी भी रेलवे मे काफी आधुनिकीकरण की गुंजाइश है। शहरों की यातायात सम्बंधी समस्याओं का समाधान MRT (Mass Rapid Transport ) या मोनो रेल से निकाला जा सकता है। मेट्रो रेल का विस्तार कई बड़े शहरों तक होना है। इस क्षेत्र मे भी काफी उम्मीदें है। इस क्षेत्र की कम्पनियां जिन पर नजर रख सकते है BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड), टेक्समाको, रेलवे ट्रैक्स और बोगियों के लिए पार्ट बनाने वाली कम्पनियां प्रमुख है।


सिंचाई सुविधाएं (Irrigation), जल संसाधन और जल आपूर्ति सुविधाएं

भारत एक कृषि प्रधान देश है, देश मे पंचवर्षीय योजनाओं मे सिंचाई सुविधाओं के लिए धन प्रदान किया जाता है। सिंचाई सुविधाओं मे क्रांतिकारी कदम उठाने की जरुरत है। नहरों को जोड़ने और नयी जल सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। हमारे यहाँ हर साल अच्छी बारिश होती है, इस बारिश का ढेर सारा पानी बिना प्रयोग किए समुंद्र मे चला जाता है, हम इस बर्षा जल के को संचित( Rain Water Harvesting) करके उसे कई अन्य प्रयोगो मे ला सकते है। इस क्षेत्र की जिन कम्पनियों पर नजर रखनी है वे है पटेल इंजीनियरिंग, जिंदल सॉ एन्ड पाइप्स, जैन इरीगेशन, आईवीआरसीएल वगैरहा।


टेलीकॉम (सूचना क्रांति)

भारत मे टेलीकाम पर काफी काम किया गया है। हरित क्रांति के बाद शायद सूचना क्रांति का ही नाम आना चाहिए। लेकिन अभी भी इस क्षेत्र मे विकास की असीम सम्भावनाएं है। मोबाइल के ग्राहक, शहरों मे तो बढ रहे है लेकिन इनको अभी गाँवो तक पहुँचना बाकी है। मेरे विचार मे 60 करोड़ ग्राहकों जिसमे 25 करोड़ गाँवो से हो, का लक्ष्य होना चाहिए। मोबाइल कम्पनियों को इस बारे मे पता है, वे इस दिशा मे अच्छा काम कर रही है। निजी क्षेत्र की भागीदारी के चलते इस सैक्टर मे विकास बहुत तेजी से हुआ है। इन्टरनैट और ब्राडबैंड के लिए भी काफी अच्छा बाजार है। इस क्षेत्र जिन कम्पनियों पर नज़र रखनी है वे है: भारती एयरटेल, रिलायंस कम्यूनिकेशन, टाटा टेलीकाम।

पोर्ट सुविधाएं

भारत मे पोर्ट सुविधाएं अभी भी कम है, निजी क्षेत्रों को पोर्ट बनाने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। अभी के जितने पोर्ट है उनमे माल लदाई की सुविधाओं का विस्तार किया जाना बाकी है। कई नए पोर्ट विकसित किए जाने बाकी है। इस क्षेत्र मे विकास की काफी गुंजाइश है। जिन कम्पनियों पर नज़र रखी जानी है वे है : जीई शिपिंग, मुंद्रा पोर्ट एवं अन्य पोर्ट सम्बंधित कम्पनियां।

एयरपोर्ट सुविधाएं

मै जब भी भारत आता हूँ, दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचते ही मेरे को भारत पहुँचने का एहसास हो जाता है। पूरा माहौल एकदम निराशाजनक दिखता है, बत्तियां बाबा आदम के जमाने की लगी हुई है, जहाँ रोशनी होनी चाहिए वहाँ पर अंधेरा होता है। हैल्प करने वाले बंदे की नजर हैल्प करने मे कम, टिप लेने मे ज्यादा रहती है। कस्टम वाले भी किसी तरह से पैसा कमाने की फिराक या फिर दारू की बोतल की जुगाड़ मे रहते है। एयरपोर्ट से बाहर निकलो तो लगता है किसी भुतहा हवेली से बाहर निकले है। कुल मिलाकर अनप्रोफ़ेशनल सा लुक रहता है। वहीं दुनिया के दूसरे एयरपोर्ट को देखो, तो लगता है भारत के एयरपोर्ट अभी गाँव देहात के बस अड्डे है।खैर… अब शायद नज़ारा बदले, सभी एयरपोर्ट को आधुनिकीकरण किया जा रहा है। जिन कम्पनियों पर नज़र रखनी है वे है: जीएमआर, जीवीके, एल एंड टी वगैरहा।

लाजिस्टिक और स्टोरेज

सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने के लिए लाजिस्टिक कम्पनियों की जरुरत होती है। इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट मे इन कम्पनिया का अहम रोल होता है। एक्सपोर्ट से इम्पोर्टर (or Vice Versa) तक माल की हैंडिलिंग इन्ही के जिम्मे होती है। कई कई बार माल को स्टोरेज करने की जिम्मेदारी भी इन कम्पनियों की होती है। कुछ नाजुक सामानों या जीवन रक्षक दवाइयों के लिए अलग किस्म की स्टोरेज की आवश्यकता होती है। लाजिस्टिंक और स्टोरेज कम्पनियों के क्षेत्र की कम्पनियों मे विकास की अच्छी उम्मीद है। जिन कम्पनियों पर नज़र रखी जानी है वे है कन्कोर, गेटवे डिस्टीपार्क वगैरहा।

प्राकृतिक गैस संसाधन

बढती जनसंख्या के साथ साथ कुकिंग गैस के उपभोक्ता भी बढ रहे है। बिना कुकिंग गैस के खाना बनाने की सोचना भी असम्भव है। अक्सर गैस पाइपलाइन के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाई जाती है। उधर पेट्रोल के पर्यावरण पर बढते असर के चलते सीएनजी का प्रयोग भी बढ रहा है। अनेक शहरों मे सीएनजी से गाड़ियां चलायी जा रही है। इसलिए आने वाले वर्षों में एलएनजी टर्मिनल, गैस ट्रांसमिशन और सीएनजी गैस डिस्ट्रीब्यूशन वाले क्षेत्रों मे विकास दर काफी होगी। जिन कम्पनियों पर नज़र रखनी है वे है: गेल (GAIL), पेट्रोनेट एलएनजी, जीएसपीएल, इंद्रप्रस्थ गैस वगैरहा।


तो जनाब ये थी इंफ़्रास्ट्रकचर की कहानी। इन सभी क्षेत्रों मे आने वाले पाँच सात वर्षों मे बूम रहेगा। जब क्षेत्रों मे बूम रहेगा तो इस क्षेत्रों की कम्पनियों की सेल्स और मुनाफ़े मे भी बूम रहेगा। इसलिए इन सभी कम्पनियों पर नजर रखिए और अपना निवेश सोच समझ कर करिए। मैने कोशिश की है कि अपनी जानकारी को आप सभी के साथ शेयर करूं। यदि कुछ चीजें छूट गयी हो तो मुझे अवश्य बताएं । इसके अतिरिक्त कई और कम्पनियां है जो इन्फ़्रास्ट्रकचर के दायरे मे नही आती, लेकिन उनके विकास भी दिनो दूनी रात चौगुनी होने है। उन कम्पनियों के बारे मे फिर कभी। ये लेख आपको कैसा लगा मुझे अवश्य बताएं।

 

क्या है महंगाई दर?

 

हम हमेशा जानने की कोशिश करते हैं कि महंगाई का पता कैसे लगता है? महंगाई जानने के कई तरीके हैं। भारत में सबसे प्रमाणिक तरीका है थोक बिक्री मूल्य में हो रहे उतार-चढ़ाव को मापना। इसके लिए एक सूचकांक (इंडेक्स) है जिसे ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (डब्ल्यूपीआई) कहते हैं। थोक मूल्य सूचकांक के बढ़ने का मतलब महंगाई में तेजी और इसके गिरने का मतलब हुआ महंगाई में कमी।

पढ़ें: पूरी दुनिया में खाना-पीना महंगा हुआ

इस सूचकांक में 435 अलग-अलग वस्तुओं का लेखा-जोखा रखा जाता है। सूचकांक में शामिल हर वस्तु को एक वेटेज यानी वजन दिया गया है। ये इस आधार पर तय किया गया है कि किन वस्तुओं की हमारी जिंदगी में कितनी अहमियत है।

पढ़ें: महंगाई पर चिदम्बरम की लाचारी

सबसे ज्यादा करीब 64 फीसदी वजन चीनी, स्टील और कपड़े जैसी वस्तुओं को दिया जाता है। इसके अलावा दाल-चीनी, फल और सब्जी जैसी जरुरी खाने-पीने की वस्तुओं को 22 फीसदी वजन दिया जाता है। ईंधन और बिजली जैसे पदार्थों को 14 फीसदी वजन दिया जाता है।

डॉक्टर और वकील की शुल्क, मकान का किराया, विद्यालय शुल्क जैसी सेवाओं की कीमत में बदलाव का लेखा-जोखा ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (डब्ल्यूपीआई) नहीं करता है। साथ ही इस सूचकांक के जरिए खुदरा कीमतों का हिसाब-किताब रखना मुश्किल होता है।

जानकारों का ये भी कहना है कि इस सूचकांक में कई ऐसी वस्तुओं की कीमतों का लेखा-जोखा होता है जिनका हमारी जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या है सबप्राइम संकट?

भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजार धड़ाधड़ गिरे जा रहे है। दलाल स्ट्रीट एक तरह से हलाल स्ट्रीट बन गया है, जहाँ निवेशक मुर्गों की तरह काटे जा रहे है। दुनिया भर के शेयर मार्कॆट आजकल एक ही गाना गा रहे है, "डूबा डूबा रहता हूँ……….. " , |इन सबकी वजहे तो कई है, लेकिन सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है अमरीका मे आया सबप्राइम संकट। इस शब्द का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। कई कई लोग तो इसके बारे मे जानते तक नही कि ये है क्या चीज और ऐसा हुआ क्यो और दुनिया भर के बाजार इससे क्यों प्रभावित हुए। आइए कुछ जानते है सबप्राइम के बारे में।

सबप्राइम क्या है?

इसकी परिभाषा (अंग्रेजी की विकिपीडिया से उठाया गया) कुछ इस प्रकार है:

Subprime lending (also known as B-paper, near-prime, or second chance lending) is the practice of making loans to borrowers who do not qualify for the best market interest rates because of their deficient credit history. The phrase also refers to banknotes taken on property that cannot be sold on the primary market, including loans on certain types of investment properties and certain types of self-employed individuals.

जैसा कि हम सभी जानते है कि एक बैंकर का काम होता है अपने ग्राहकों की जमाराशि पर ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाना ताकि ग्राहकों को अच्छा ब्याज और सेवाएं देकर बांधकर रखा जाए। बैंक जमाराशि को कई योजनाओ मे निवेशित करते है और कई व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्याज पर पैसा भी देते है। अमरीका मे आपको कोई भी बैंक तभी पैसा देता है जब आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी हो, यानि आप पैसा चुका पाने की क्षमता मे हो। लेकिन यदि आपकी क्षमता अच्छी नही होती तो भी आपको पैसा मिल सकता है कि लेकिन ब्याजदर काफी ऊंची होगी, क्योंकि यह उधारी काफी जोखिम भरी होगी। ज्यादा मुनाफ़ा कमाने के चक्कर मे अक्सर बैंक सबप्राइम लैंडिग यानि ऐसी उधारी बाँट देते है, जो काफी जोखिम भरी होती है। ये देनदारिया हाउसलोन्स,रिफ़ाइनेंसिंग, कार लोन्स और क्रेडिट कार्ड लोन्स के रुप मे दी गयी थी। अमरीका मे ऐसा ही हुआ, सिटीबैंक ने ऐसी ढेर सारी उधारी बाँट दी, जो देनदार वापस नही चुका सके। फिर? जेल मे डालों उनको…..का बात करते हो बबुआ, अमरीका है, इंडिया थोड़े ही है, कि आप उधार के पैसे नही चुकाओगे तो सिटी बैंक अपने गुंडे सॉरी कलैक्शन एजेन्ट भेज देगा।

अमरीका के कानून के हिसाब से भी आप देनदार को ज्यादा परेशान नही कर सकते, ऊपर से अमरीका मे चुनाव का वर्ष चल रहा है, इसलिए सरकार बीच मे कूद पड़ी और सिटीबैंक को सबप्राइम की वजह से घाटा सहना पड़ा और उसके चीफ़ एक्जीक्यूटिव को इस्तीफ़ा भी देना पड़ गया। हालात तो यहाँ तक बिगड़ गए थे कि सिटीबैंक दिवालिया होने की कगार पर आ गया था, अब मध्यपूर्व एशिया के कुछ शेखों ने वहाँ पर करोड़ो डालर लगाएं है, ताकि अमरीकी आका को खुश किया जा सके और इस चुनावी वर्ष में अमरीका को इस सबप्राइम संकट से बचाया जा सके। इस तरह से अमरीकी अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ़ जा रही है। लेकिन वहाँ पर अभी एक और संकट आने वाला है, वो है क्रेडिट कार्ड डिफ़ाल्टर संकट, अब इस बारे मे अगली तिमाही तक ही कुछ सही पता चल सकेगा। खैर…..आगे पढिए।


तो ये अमरीका का निजी संकट हुआ ना, वो झेले, हम काहे भरें?

आपका सवाल और खीझ वाजिब है, ये अमरीका की निजी समस्या है, कल्लू धोबी की जिन्दगी भर की कमाई काहे डूबे शेयरमार्केट मे वो भी इस अंकल सैम या उन टुच्चे अमरीकियों के चक्कर में, जो पैसा डकार गए। देखा भैया, दुनिया एक गाँव है, हर देश की अर्थव्यवस्था दूसरे की अर्थव्यवस्था से प्रभावित होती है। फिर अमरीका दुनिया का दादा है। दुनिया भर के अमीरों के पैसे अमरीका मे जमा पड़े है। अमरीका दुनिया मे से सबसे ज्यादा माल मंगाता है। फिर क्या है ना अमरीका दादागिरी करता है, मोहल्ले के दादा के घर मे बत्ती ना आए, तो दूसरे के घर मे रोशनी हो सकती है क्या भला? अब शेखों को ही देखो, मरते क्या ना करते, बेचारो ने भरा है ना अमरीकियों का कर्ज, सिटीबैंक मे पैसा लगाया है कि नही।


लेकिन दुनिया भर के शेयर बाजार क्यों गिरे?

दुनिया भर के शेयर बाजारों मे अमरीकी संस्थागत निवेशकों के पैसे लगे हुए है। सिटी बैंक भी एक संस्थागत निवेशक है। अब अगर अमरीकी अर्थव्यवस्था धीमी या मंदी होगी तो दुनिया भर के बाजारों पर असर तो पडेगा ही ना। अब भारत के शेयर मार्केट मे संस्थागत निवेशको का बहुत पैसा लगा हुआ है, एक तरह से देखा जाए तो लगाम उन्ही के हाथों मे है। इन्होने यहाँ अच्छा पैसा भी कमाया है। इन्ही एफ़आईआई द्वारा चवन्नी अठन्नी (अमरीकी चवन्नी की बात हो रही है) मे खरीदे हुए शेयरों को लोग आज सौ दो सौ रुपए पर भी खरीद कर गर्व महसूस करते है। तो खुद ही समझ लो, कि इन संस्थागत निवेशकों का मुनाफ़ा कितना ज्यादा होगा। अब इन्होने कमाया कि नही पैसा भारतीय बजार से। अब अगर अमरीकी अर्थव्यवस्था मे मंदी के संकेत है तो अमेरिकी बैंकों को भारी नुकसान हुआ और वहां के बाजार टूटते गए। नुकसान पूरा करने के लिए अमेरिका के बड़े फंड और बैंक दूसरे बाजारों में मुनाफावसूली कर रहे हैं। विश्वव्यापी बाजारों मे मंदी के डर की वजह से सभी संस्थागत निवेशक अपना पैसा गिरते बाजारों से निकालकर अपने हाथ मे रखना चाहते है, ताकि सही समय पर सही जगह पैसा लगाया जा सके। सिटीबैंक ने भी अपनी ढेर सारी होल्डिंग्स को बाजार मे बेचा है। अब शेयर ट्रेडिंग मे क्या होता है कि ये खुजली की बीमारी है, जब जब संस्थागत निवेशक बेचते है, बाकी सभी भी बेचने लगते है और देखादेखी मे बाजार भड़भड़ाकर नीचे आ जाते है। अब अगर एक देश का बाजार नीचे आता है तो पूरे क्षेत्र के बाजार दहशत मे आ जाते है। शराफ़त की भाषा मे इसे दूसरे बाजार से क्लू लेना बोलते है। जापान अमरीका से क्लू लेकर, सिंगापुर, चीन, मलेशिया, भारत और यूरोप बाजार को देता है, और ये बाजार ऐसे ही क्लू लेते हुए, अमरीका बाजार को टिका देते है, जो फिर उस दिन गिरकर, जापान को अगले दिन का क्लू दे देता है, और ये सिलसिला तब तक जारी रहता जब तक निवेशकों का डर समाप्त नही होता।


भारतीय अर्थव्यवस्था का क्या?…….उसके बारे मे अगली पोस्ट मे, सारा इसी मे लिखवा लोगे क्या? अर्थव्यवस्था पर ये मेरा पहला लेख है, आपको कैसा लगा, जरुर बताइएगा। जाते जाते एक डिसक्लेमर : इस बाजार मे लेखक के भी पैसे डूबे है, अगर अमरीकी अंकल डूबते हुए लोगों को पैसे बाँटे तो हमको भी बता देना।किसी ने निकले तो हमारे भी निकलवा देना।

ये सीआरआर(CRR) क्या बला है?

यदि आप बिजिनैस न्यूज चैनल देखते होंगे या व्यापार सम्बंधित खबरे पढते होंगे तो आपने अक्सर सीआरआर (CRR) का जिक्र सुना होगा। क्या आप जानते है सीआरआर क्या बला है? चलिए आज कुछ इसी बारे मे बात कर लेते है। आगे बढने से पहले थोड़ा महंगाई (Inflation) का भी जिक्र करना बहुत जरुरी होगा।



महंगाई क्या है? इसकी घट बढ को कैसे मापा जाता है?

महंगाई दरअसल जरुरी चीजों की कीमतो मे होने वाली बढोत्तरी है। उदाहरण के लिए गेहूँ की कीमते, पिछली खरीदारी मे यदि 10 किलो गेहूँ आप 100 रुपए मे लाते थे और वही गेहूँ आज 110 रुपए मे मिल रहा है तो इसका मतलब है कि महंगाई 10 रुपए अथवा 10% बढ गयी है। अच्छा ये तो रही गेंहूँ की कीमत, लेकिन सरकार इसको कैसे मापती है? अरे भई सरकार ने ढेर सारी जरुरी चीजों के खुदरा मूल्यों के लिए विभिन्न सूचकांक तय कर रखे है, यदि इन सूचकांको मे बढोत्तरी होती है तो इसका मतलब है कि महंगाई बढ रही है। इन सूचकांको मे मुख्यत: उपभोक्ता सूचकांक (Consumer Price Index- CPI), रहन सहन सूचकांक (Cost of Living Index-COLI), उत्पादक सूचकांक(Producer Price Index - PPI) तथा कुछ अन्य भी होते है। महंगाई बढने के कई कारण होते है, फसल का ठीक ना होना, सरकार द्वारा मूल्य नियंत्रित ना कर पाना, कुछ सरकारी नीतियों मे गलतियां, आयात-निर्यात नीति, वस्तुओं की मांग और आपूर्ति और मुद्रा की अधिक उपलब्धता (Excess Liquidity) का होना।

बाकी सभी चीजे तो समझ मे आ गयी लेकिन ये मुद्रा की उपलब्धता का क्या मतलब हुआ?

अब जैसा कि आपको पता है बाजार मे मुद्रा का आवागमन उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। अब जो वित्तीय संस्थान (जैसे बैंक) होते है उनका काम ही होता है लोगो से जमाराशिया लेना और उसे दूसरे जरुरतमंद लोगो को देना। और इन कार्यों से लाभ कमाना। उदाहरण के लिए यदि किसी बैंक के पास ढेर सारी जमाराशि है, तो वह चाहेगा कि इस जमाराशि को बाजार मे ऋण देकर और उस पर अधिक से अधिक ब्याज कमाए। अब जितना ज्यादा पैसा बाजार मे आएगा उतना ही महंगाई बढेगी (वैसे ये हमेशा जरुरी नही), उदाहरण के लिए यदि एक फ़्लैट आपको २० लाख का मिल रहा है, और उसके लिए आपको 85% ऋण भी सस्ती ब्याजदरों पर मिल रहा है तो आप उसे लेना पसंद करेंगे, हो सकता है, अगले साल लेने का प्लान हो, लेकिन इसी साल लेना पसंद करेंगे। बैंको की ब्याज दरें भी मुद्रा की तरलता पर निर्भर करती है और हाँ एक और जरुरी चीज इसमे शामिल होती है वो है सीआरआर ।

अब ये सीआरआर क्या बला है?

वही तो बता रहा हूँ यार! आइए पहले इसकी परिभाषा जान लेते है:

Cash reserve Ratio (CRR) is the amount of funds that the banks have to keep with RBI. If RBI decides to increase the percent of this, the available amount with the banks comes down. RBI is using this method (increase of CRR rate), to drain out the excessive money from the banks

अब क्या है कि भारत मे जितने भी बैंक है वो रिजर्व बैंक के अधीन काम करते है। एक तरह से रिजर्व बैक इन सभी की अघोषित गारंटी लेता है। अब रिजर्व बैंक किसी भी बैंक की गारंटी कितनी लेता है यह निर्भर करता है कि उस बैंक ने रिजर्व बैंक के पास कितना पैसा/प्रतिभूतिया/स्वर्ण जमा कर रखा है। अमूमन हर बैंक को रिजर्व बैंक की सीआरआर नीति के अनुसार ही पैसा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। रिजर्व बैंक का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार मे मुद्रा(रुपए) की जरुरत के मुताबिक ही तरलता(उपलब्धता) रहे, इसको कम या ज्यादा करने के लिए रिजर्व बैंक अपनी CRR के प्रतिशत मे घट-बढ करता रहता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि रिजर्व बैंक ने अपनी CRR मे आधे प्रतिशत की बढोत्तरी कर दी, तो सभी बैंको को अपनी सीमा से आधा प्रतिशत और पैसा रिजर्व बैंक के पास जमा कराना पड़ेगा, नतीजतन बैंक के पास फंड कम हो जाएंगे, जब फंड कम पडेंगे तो मजबूरन वे अपनी उधारी देने की ब्याज दरें बढाएंगे, ताकि ऋण की मांग मे कमी आए। ब्याजदरें बढेंगी तो लोग उधार कम लेंगे। उधार कम लेंगे तो चीजों की मांग मे कमी आएगी। मांग मे कमी आएगी तो महंगाई मे कमी आएगी। देखने मे तो ये एक लम्बा प्रोसेस दिखता है, लेकिन अक्सर कारगर होता है। इस तरह से सरकार के लिए महंगाई घटाने का यह एक उपाय है।

लेकिन CRR बढने से आम आदमी और शेयर बाजार इससे कैसे प्रभावित होता है?

लाख टके का सवाल है। इस सवाल का जवाब निर्भर करता है कि आम-आदमी है क्या चीज।
यदि आप उत्पादक है तो समझिए की आपके माल की मांग मे कमी आने वाली है। आप नुकसान मे रहेंगे।
यदि आप उपभोक्ता है तो समझिए चीजों के दामों मे कुछ तो कमी आने वाली है। आप फायदे मे है।
यदि आपने किसी बैंक से परिवर्तनशील(Variable) ब्याज दरों पर ऋण ले रखा है, समझिए आप पर ब्याज का बोझ बढने वाला है। यदि आपने ऋण स्थायी(Fixed) दरों पर लिया है तो चादर तान कर सो जाइए, शामत बैंक की आएगी, आपकी नही। इसी स्थिति से बचने के लिए बैंक आपको परिवर्तनशील ब्याज दरों पर ऋण ठेलने की कोशिश करते है, समझे लाला?
यदि आप निवेशक है और आपने शेयर बाजार मे निवेश किया है तो सतर्क हो जाइए, बाजार मे मुद्रा तरलता की समस्या (Liquidity Crunch) आने वाली है।बाजार मे इस गतिविधि के कारण कुछ उतार चढाव आ सकते है। यदि आपने प्रतिभूतियों(Debt Instruments) वगैरहा मे निवेश किया है, आपको ज्यादा ब्याज मिलेगा, मजे करिए।
कुछ उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकते है, नतीजतन उनके शेयरों मे भी गिरावट आ सकती है।

इस तरह से प्रत्येक व्यक्ति इस CRR के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित जरुर होता है। आशा है आपकी CRR और महंगाई सम्बंधित जानकारी मे कुछ बढोत्तरी जरुर हुई होगी। इस सम्बंध मे यदि आपके जेहन मे कोई और सवाल है, अथवा आप इस बारे मे ज्यादा जानना चाहते है तो टिप्पणी के माध्यम से मुझसे सम्पर्क करें। ये लेख आपको कैसा लगा बताना मत भूलिएगा।

PROFILE AND ADDRESS


NGO List
Action India
Address: 5/27 A, Jungpura B, New Delhi 110014, India
Phone: 91-11-2431 4785, 2432 7470
Email: action@nda.vsnl.net.in
Contact person:
Gauri Chaudhary
Profile: Awaited




Agency for Community Care and Development (ACCAD)
Address: B-10/7059, Vasant Kunj, New Delhi, India
Phone: 9811117021
Email: drlalthangsing@vsnl.net
Contact person:
Dr Chinkholal Thangsing
Profile: A clinic for people living with HIV/AIDS. Provides medication, counselling and support


AIDS Awareness Group
Address: 119 Humayanpur, Safdarjung Enclave, New Delhi 110 029, India
Phone: 92-11-2628 7953/4
Email: Awaited
Contact person:
Elizabeth Vatsyayan
Profile: Activities include counselling, awareness generation, support services and legal aid

Alarippu
Address: 28-B/4, 3rd Floor, Jia Sarai, Near IIT Gate, New Delhi 110 016, India
Phone: 91-11-2652 8639
Email: alathedu@yahoo.co.in
Contact person:
Tripurari Sharma
Profile: Works on awareness generation, education and training, health and nutrition among women and youth

Breakthrough
Address: C3/15, SafdarJung Development Area, New Delhi 110 016, India
Phone: 91-11-2696 7040
Email: vidya@breakthrough.tv
Contact person:
Mallika Dutt/Vidya Shah
Profile: A cultural organisation that raises awareness about social justice through popular culture, media and the Internet

Centre For Advocacy and Research (CFAR)
Address: C-100/B, Ist Floor Kalkaji, New Delhi 110 019, India
Phone: 91-11-2629 2787, 2643 0133, 2622 9631
Email: cfarasam@ndf.vsnl.net.in
Contact person:
Akhila Sivadas
Profile: Advocacy and research in, and on, the media, in order to strengthen the gender and development perspective of the mass media. It monitors print, radio and television

Delhi AIDS Niyantran Samiti
Address: 11, Lancer Road, Mall Road, Timarpur, Delhi 110 054, India
Phone: 91-11-23815804/23392019
Email: sacs_delhi@nacoindia.org
Contact person: Arun Baroka
Profile: Government AIDS programme implementation agency at the state level

Delhi Network for People Living with HIV/AIDS (DNP+)
Address: 110, 2nd floor, Shahpurjat, New Delhi 110 049
Phone: 91-11-2649 0185
Email: dnpplus@yahoo.co.in
Contact person: Naveen Kumar
Profile: A network of HIV+ persons involved in counselling, forming self-help and support groups, information dissemination, advocacy and referral services

Human Rights Law Network
Address: 65 Masjid Road, Jangpura, New Delhi, India
Phone: 91-11-2431 6922
Email: hrlndel@vsnl.net
Contact person: Shalini Singh
Profile: A national network providing free legal aid services and working to protect human rights

Institute of Social Sciences (ISS)
Address: 8, Nelson Mandela Road, New Delhi 110 070, India
Phone: 91-11- 2612 1902, 2689 5370
Email: iss@nda.vsnl.net.in
Contact person: George Matthew
Profile: Works on socially relevant research on governance, local democracy, urban studies, women's studies, globalisation and human rights

Institute of Social Studies Trust (ISST)
Address: India Habitat Centre, Upper Ground Floor, Core 6A, Lodhi Road, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2464 7873
Email: isstdel@vsnl.com
Contact person: Ratna Sudarshan
Profile: Conducts research and action programmes to promote social justice and equity for the under-privileged with a focus on women

Jagori
Address: C-54, ND South Extension II, New Delhi 110 049, India
Phone: 91-11-2265 3629
Email: jagori@del3.vsnl.net.in
Contact person: Kalpana Vishwanath
Profile: A resource centre focussing on women's issues: violence against women, alternative health systems, sexual violence, communication, trafficking of women and children

MARG
Address: 125, Shahpur jat, New Delhi 110 049
Phone: 91-11-2469 7483/6925
Email: marg@del2.vsnl.net.in
Contact person: Vasudha Dhagamwar
Profile: Legal literacy, research, documentation and dissemination of information to both the affected and the policy makers

National AIDS Control Organisation (NACO)
Address: 9th floor, Chandralok Building, Janpath, New Delhi, India
Phone: 91-11-2332 5331/2373 1774
Email: mdg@nacoindia.org
Contact person: Meenakshi Dutta Ghosh
Profile: The central government's nodal organisation for formulation of policy and implementation of programmes for prevention and control of HIV/AIDS in India

Naz Foundation (India) Trust
Address: D-45, Gulmohar Park, New Delhi 110 049, India
Phone: 91-11-2656 7049/3929
Email: nazindia@bol.net.in
Contact person: Dr Anjali Gopalan
Profile: Has programmes on women's sexual health, clinical intervention (to control STDs and bring about behaviour change to check the spread of HIV), research and a care home

North East Network
Address: 42, Desbandhu Society, 15 Patparganj, New Delhi 110 092, India
Phone: 91-11-26312355
Email: nendelhi@vsnl.net , assamnen@yahoo.co.uk
Contact person: Dr Monisha Behal
Profile: Awaited

Population Council
Address: Zone 5A, Ground Floor, India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2461 0912
Email: monica@pcindia.org
Contact person: Dr Saroj Pachauri
Profile: An international, non-profit organisation that conducts research on three fronts: biomedical, social science, and public health to help change the way people think about problems related to reproductive health and population growth

Positive Life
Address: 2 E, 3rd floor, Church Compound, Sukhdev Vihar, New Delhi 110 025, India
Phone: 91-11-2691 5321/2692 2839
Email: plife@vsnl.com
Contact person: Mona Mishra
Profile: A network for HIV+ people that provides legal and social support, and guidance to HIV+ persons and their families

Sahara
Address: E-453, Greater Kailash II, New Delhi
Phone: 91-11-2621 9147/2656 9503
Email: sahara@nde.vsnl.net. in
Contact person: Elizabeth Selhore
Profile: Runs a care home for HIV+ women

Sahara Women and Children's Home
Address: A-148, Neb Valley, Neb Sarai, New Delhi 110 068, India
Phone: 91-11-2653 0502
Email: saracare@vsnl.net
Contact person: Info awaited
Profile: A shelter home for HIV positive women and their children

Tarshi
Address: 49 Golf Links, 2nd floor, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2461 0711
Email: tarshi@vsnl.com ,Contacttarshi@tarshi.org
Contact person: Radhika Chandiramani
Profile: Works on sexuality, sexual and reproductive health, STDs and HIV/AIDS and sexual abuse. Activities include a tele Phone helpline, publications and awareness generation

The Hunger Project (THP)
Address: B 3/18, 2nd Floor, Vasant Vihar, New Delhi 110 057, India
Phone: 91-11-26154181/82/83/84
Email: thp@vsnl.net
Contact person: Rita Sareen
Profile: Awaited

UN Office on Drugs and Crime (UNODC)
Address: EP 16/17, Chandragupta Marg, Chanakyapuri, New Delhi 110 021, India
Phone: 91-11-2410 4970/1/2/3
Email: fo.india@unodc.org
Contact person: Info awaited
Profile: Fights against illicit drugs and international crime, and consists of the Drug Programme and the Crime Programme.

UNAIDS
Address: c/o UNDP, 55, Lodhi Estate, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2462 6156
Email: windandersenk@unaids.org
Contact person: Dr Kenneth Wind-Andersen (country director)
Profile: Leads, strengthens and supports an expanded response aimed at preventing transmission of HIV, providing care and support, reducing the vulnerability of individuals and communities to HIV/AIDS, and alleviating the impact of the epidemic

UNDP (REACH Beyond Borders, HIV & Development Programme)
Address: 13, Jor Bagh, Lodhi Estate, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2463 2339/2602
Email: webadmin.in@undp.org
Contact person: G Pramod Kumar (senior advocacy and communications officer)
Profile: The UN's global development network; advocating for change and connecting countries to knowledge, experience and resources to help people build a better life

UNIFEM
Address: 223, Jor Bagh, New Delhi 110 003, India
Phone: 91-11-2464 8497/2469 8297
Email: vandana.mahajan@undp.org
Contact person: Suneeta Dhar/Vandana Mahajan
Profile: The UN's development fund for women; provides financial and technical assistance to innovative programmes and strategies that promote women's human rights, political participation and economic security

Observer Research Foundation
20, Rouse Avenue Institutional Area,
New Delhi - 110 002, INDIA
Ph. : +91-11-43520020, 30220020
Fax : +91-11-43520003, 23210773
E-mail: contactus@orfonline.org

The Institute for Defence Studies and Analyses
1, Development Enclave, (near USI)
New Delhi 110 010
Telephone: 91-11-2671 7983 (30 lines)
Fax: 91-11-2615 4191
E-mail: idsa@vsnl.com

Institute of Peace and Conflict Studies (IPCS)
B-7/3 Lower Groud Floor
Safdarjung Enclave
New Delhi 110029
INDIA
Tel: 91-11-4100 1900; 4165 2556-59
Tel/Fax: 91-11-4165 2560
Or email us at : officemail@ipcs.org

IMPORTANT HINDI SITES
http://www.rajdhanitimes.com/international/international%20news.htm
http://www.loktej.com/amazing_world.php?cat_no=8
http://www.dlamedia.com/epapermain.aspx

Importants sites
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