Thursday, July 31, 2008

क्या है विश्वासमत प्रस्ताव

लोकसा मेेंं जब कोई सरकार अथाZत प्रधानमंत्री यह सिद्ध करने के लिए प्रस्ताव करती है कि उसके पास सदन में आवश्यक बहुमत है और इसके लिए वह मतदान के लिए तैयार है, तो इसे सामान्यतौर पर विश्वासमत प्रस्ताव नाम से जाना जाता हैण् इसमें वोटिंग के लिए केवल लोकसा के सांसद ही योग्य होते हैं, इस तरह राज्यसा के सांसद वोÇटग प्रक्रिया में ाग नहीं ले सकतेण् उदाहरण के तौर पर हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिह राज्यसा से सांसद होने के कारण सरकार के मुखिया होने के बावजूद ी वह मतदान में ाग नहÈ ले सकते, लेकिन वह बहस में ाग ले सकते हैंण्
अविश्वास प्रस्ताव और विश्वासप्रस्ताव मत में क्या अंतर है
यह दोनों ही संसदीय प्रकिया का अंग है, जिसके तहत सदन में सरकार के बहुमत को जांचा जाता हैण् विश्वासमत की प्रस्तावना सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री द्वारा रखा जाता है जबकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की तरफ से लाया जाता हैण्
विश्वासमत प्रस्ताव मेें हार पर क्या हो सकता है
यदि सरकार सदन में विश्वासप्रस्ताव के दौरान सामान्य बहुमत साबित नहÈ कर पाती है तो ऐसे में सरकार को या तो इस्तीफा देना होता है अथवा वह लोकसा को ंग करके आम चुनाव की सिफारिश राष्ट्रपति से कर सकते हैंण् फिर यह राष्ट्रपति पर निZर करता है कि वह नयी सरकार को आमंत्रित करें अथवा ऐसा संव न होने पर वर्तमान सरकार को ही चुनाव संपé होने और नयी सरकार के बनने तक कार्यवाहक सरकार के तौर पर काम करने को कहेण् एक रोचक तथ्य यह ी है कि यदि सरकार विश्वासमत जीत जाती है तो 15 दिन बाद विपक्ष पुन: सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता हैण् दरअसल, संसदीय प्रावधान में कहा गया है कि एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाने के के छ: महीने बाद ही दुबारा अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा लाया जा सकता है, जबकि विश्वासमत सरकार की तरफ से लाया जाता है इसलिए उक्त कानून इस पर लागू नहÈ होताण्
विश्वासमत हासिल करने की प्रक्रिया क्या है और वोटों की गिनती कैसे होती है
विश्वासमत प्रस्ताव की अवधारणा संविधान में नहÈ रखा गया है बल्कि इसका प्रावधान संसद की कार्यवाही प्रक्रिया के तहत किया गया हैण् पहली बार विश्वासमत प्रस्ताव वीपी Çसह सरकार के समय में लाया गया थाण् संसद के पूर्व महासचिव सीके जैन के मुताबिक विश्वासमत हासिल करने के लिए सरकार को सामान्य बहुमत अथाZत लोकसा के कुल उपस्थित सदस्यों के आधे से एक अधिक (50 प्रतिशत + 1) मत प्राप्त करना होता हैण् गौरतलब है कि लोकसाध्यक्ष को वोट देने का अधिकार नहÈ होताण् हालांकि वह निर्णायक वोट कर सकता हैण् उदाहरण के लिए यदि पक्ष और विपक्ष में पड़े मत बराबर हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में लोकसाध्यक्ष का वोट निर्णायक माना जाता हैण् लोकसा में कुल 545 सीटें हैं, जिसमें मेरठ और वेल्लारी की सीटें खाली हैण् पीसी थॉमस को वोट देने का अधिकार नहÈ हैण् इस प्रकार वर्तमान में सांसदों की कुल संख्या 543 हैण् बहुमत के लिए सरकार को कुल 272 मत पाना अनिवार्य हैण् लेकिन यदि मतदान के समय 540 सदस्य ही ाग लेते हैें तो सरकार को बहुमत के लिए 271 मतों की ही जरूरत होगीण् किसी स्थिति में यदि सरकार निर्धारित मत हासिल करने में असफल होती है तो वह सदन का विश्वास खो देगीण्
मतदान कैसे होता है
मतदान के दौरान सांसदों को मत देते समय लाल, हरा और पीला बटन दबाना होता हैण् हरा बटन दबाने का अर्थ है कि उस सांसद द्वारा सरकार के विश्वासमत को समर्थन दिया जा रहा है और लाल बटन उस सांसद के असमति अथवा विरोध को बताता है जबकि पीला बटन संबंधित सांसद के वोÇटग में ाग न लेने अथवा गैर-हाजिरी माना जाता है और उसके वोटों की गिनती अनुपस्थित सदस्यों की श्रेणी के तहत किया जाता हैण् लेकिन यदि किसी सांसद से गलती से पीला बटन दब जाता है और वह अपनी गलती के बारे में लोकसाध्यक्ष को तत्काल जानकारी देता है तो उसके अनुरोध को लोकसाध्यक्ष द्वारा स्वीकार ी किया जाता है और उसे पुनर्मतदान की अनुमति मिलती हैण्

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