Saturday, May 31, 2008

महंगाई और चुनाव-1


राजनाथ सिंह
बीजेपी, राष्ट्रीय अध्यक्ष



कांग्रेस के शासन काल में हर मोर्चे पर तबाही ही तबाही दिख रही है। मैं समझता हूं अब तक कांग्रेस का वह गरूर जरूर टूट गया होगा कि सिर्फ उसे ही शासन करना आता है। बल्कि यह साबित हो गया है कि उसे शासन करना कतई नहीं आता। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन देश को जिस मुकाम पर ले आई है, आम लोगों को यह कसक जरूर हो रही होगी कि वर्ष 2004 में उन्होंने एनडीए सरकार को हटाकर भारी भूल की। आम आदमी का नारा देकर शासन में आई यूपीए सरकार ने उसे तबाह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जानेमाने अर्थशास्त्री हैं लेकिन आसमान छूती महंगाई के सामने उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

अब यूपीए की सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। देश के लोग अब बीजेपी को आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्हें एनडीए के शासन के उस जमाने की याद सता रही है, जब महंगाई पूरी तरह सरकार के काबू में थी। यूपीए गठबंधन कोई सरकार नहीं बल्कि आम आदमी के खिलाफ एक षडयंत्र नजर आ रहा है।

तमाम दावों के बावजूद महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब जबकि महंगाई की दर 7.4 तक पहुंच गई है तो कांग्रेस को यह मान लेना चाहिए कि आम लोगों को महंगाई की मार से बचाने का माद्दा उसमें नहीं बचा। कांग्रेस जितने दिनों तक सत्ता में बनी रहेगी, देश का बेड़ा गर्क होता रहेगा। स्थिति और भी बदतर होने वाली है। कांग्रेस पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का तर्क देकर अपनी विफलता नहीं छिपा सकती है। दुनिया के किसी भी देश में महंगाई की यह स्थिति नहीं है। सच यह है कि मौजूदा महंगाई यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा है।

आम आदमी के साथ कांग्रेस ने छल किया है, जिसका खामियाजा उसे आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतना ही पड़ेगा। महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस की पोल खोलने के लिए बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है। बीजेपी महंगाई को आगामी चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। यह महंगाई कांग्रेस को आगामी चुनावों में बड़ी महंगी पड़ने वाली है। संसद के भीतर और बाहर हम कांग्रेस को चैन से नहीं रहने देंगे। अब पानी सिर के बहुत ऊपर आ चुका है। यूपीए सरकार जल्द से जल्द महंगाई पर श्वेत पत्र जारी करे और आम जनता के सामने अपना 'जुर्म' स्वीकार करे।

देश के सबसे बड़े उत्पादक एवं उपभोक्ता किसानों की दुर्दशा के लिए भी कांग्रेस पूरी तरह से दोषी है। किसान यूपीए के पिछले 4 साल के शासन में जितने तबाह हुए हैं, उतने पहले कभी नहीं हुए थे। बजट में किसानों की कर्ज माफी की तथाकथित महत्वाकांक्षी स्कीम के बाद सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों का मनोबल इस कदर टूट चुका है कि उन्हें आत्महत्या करने के सिवा कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। कर्ज माफी की योजना भी किसानों के प्रति कांग्रेस का छल ही साबित हुई है।

लोकसभा चुनाव के बाद हम सत्ता में आए तो हम दिखा देंगे कि किसानों की समस्याएं कैसे हल की जाती हैं। किसानों के स्वाभिमान को फिर बहाल करने का पूरा ब्लूप्रिंट हमने तैयार कर रखा है। किसानों की बढ़ती समस्याओं के लिए हम सरकार को बहुत पहले से आगाह करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

कांग्रेस अपनी कोई भी ऐसी उपलब्धि बता दे जिस पर उसे नाज हो। महंगाई का सवाल हो, किसानों का सवाल हो या फिर आतंकवाद से जंग करने का सवाल हो, हर मोर्चे पर कांग्रेस नीत सरकार विफल ही साबित हुई है। अब कांग्रेस के पास कुतर्क देने के सिवा और कुछ भी नहीं बचा है। एनडीए की पूर्व की सरकार ने देश में आर्थिक विकास का जो दौर शुरू किया था, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने उसे भी जाया कर दिया। देश की अर्थव्यवस्था मंदी के भंवर में फंसने ही वाली है। कांग्रेस अपने पूरे शासन काल में बस एक ही काम करती रही। वह है वोट बैंक की राजनीति। पिछले 4 सालों में एक खास समुदाय के तुष्टीकरण के जरिए कांग्रेस समाज की समरसता में जहर घोलने का काम करती रही।

आतंकवाद जैसे अहम मसले को भी उसने वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। आतंकवाद को काबू में करने के लिए जहां कड़े से कड़े कानून की जरूरत थी, कांग्रेस ने पहले से बने पोटा कानून को रद्द कर दिया। आतंकवाद के प्रति कांग्रेस के सॉफ्ट रुख का ही नतीजा है कि उसकी जड़ें वहां भी फैल गई हैं, जहां आतंकवाद का नामों निशान नहीं था।

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